Monday, February 8, 2016

बुद्ध बोले- अँगुलीमाल तुम शुद्ध हो गये बुद्ध हो गये, अब तुम अरहंत बन गये हो

कहते है एक अँगुलीमाल नाम का डाकू जिसने 1000 लोगो को मारने की तथा उनकी अँगुली काट कर माला पहेनने की कसम खायी थी।
ये बात उस समय की है, जब उसने 999 लोगो की हत्या कर चूका था। वो जिस जंगल में रहेता था, उसके आतंक के कारण उस जंगल से लोगो ने गुजरना ही बंद कर दिया था।
एक दिन तथागत बुद्ध को किसी अन्य गाँव जाना था, तो वो उस जंगल वाले रास्ते से जाने लगे तो गाँव वालो ने बुद्ध को बहोत समझाया। अँगुलीमाल के बारे में बताया। लेकिन बुद्ध बोले कोई इंसान अपने मार्ग से भटक गया है। उसे सही रास्ते में लाना होगा। इसलिए मैं इसी रास्ते से जाऊंगा। 
जब बुद्ध जंगल के बिच में पहुँचे ही थे की सामने अँगुलीमाल आ गया। और कहने लगा- कौन है तू? इस रास्ते से कई महीनो से कोई मेरे डर के कारण गुजरा नही, तू मुझे जानता नही क्या?
बुद्ध बोले- मुझे पता है! तुम अँगुलीमाल हो और तुमने 999 लोगो की हत्या की है।
अँगुलीमाल- मेरे बारे में सब जानते हुए भी तू चला आया तुझे मौत से डर नही लगता क्या?
बुद्ध- मौत से तो उन्हे डर लगता है, जिनकी चाहते बाकि हो, मेरी तो बस साँसे बाकि है, चाहते तो खत्म हो चुकी है।
अँगुलीमाल ने तलवार निकाली और कहा मरने को तैयार हो जा।
बुद्ध मुस्कुराते हुए खड़े रहे।
अँगुलीमाल बोला- मैंने 999 लोगो को मारा लेकिन तू एक पहला इंसान मिला है, जिसके सामने मौत खड़ी है, फिर भी मुस्कुरा रहा है। मौत को सामने देख लोगो का चेहरा फीका पड़ जाता है। लेकिन तेरे चेहरे की चमक बड़ गयी है। मैंने मरते समय लोगो को डरा सा काँपता हुआ अपनी जान की भीख माँगते हुए ही पाया है। 
तुझमे जरूर कुछ खास है की तुझे मारने में मुझे डर लग रहा है। तू मुझे सीखा कैसे डर से मुक्त हो सकते है।
बुद्ध बोले- बिलकुल सिखाऊंगा तुम मेरे साथ चलो और मेरे बताये हुए मार्ग पर चलने का अभ्यास करना।
कहते है बुद्ध के बताये मार्ग पे चलकर अँगुलीमाल जैसा डाकू संत बन गया।
संत बनने के बाद एक बार वो भिक्षा माँगने गाँव गया तो वहा के कुछ लोगो ने उसे पहेचान लिया तथा कहने लगे ये डाकू अँगुलीमाल है जिसने हमारे बाप दादाओ को मारा है, मारो इसे।
लोगो ने अँगुलीमाल को पत्थर मार मार कर लहूलुहान कर दिए। 
जब अँगुलीमाल अपनी अंतिम साँसे गिन रहा था उतने में बुद्ध उसके पास पहुँचे। तथा अँगुलीमाल से पूछा जब लोग तुम्हे मार रहे थे तो तुम्हे कैसा लग रहा था। 
अँगुलीमाल ने कहा- मैं प्रसन्न था की मुझे मेरे कर्मो की सजा मिल रही है। और जो मुझे मार रहे थे उनके प्रति भी मेरे मन में करुणा जाग रही थी की इन लोगों का भला हो।
बुद्ध बोले- अँगुलीमाल तुम शुद्ध हो गये बुद्ध हो गये, अब तुम अरहंत बन गये हो। । ।
🎋🎋नमो बुद्धाय🎋🎋

Thursday, February 4, 2016

भारत के विपश्यना केन्द्रो की सूची और उनके फ़ोन नंबर

🌹भारत के विपश्यना केन्द्रो की सूची और उनके फ़ोन नंबर--
-(A)
उत्तर भारत में--
1- नयी दिल्ली(लॉजिक स्टेट फ़ोन 01126452772)
2- हरियाणा में सोहना,(phone 9812655599) सोनीपत(09991874524), करनाल, (phone 01842257543)रोहतक(09416303639)
3- पंजाब में होशियारपुर(phone 01882272333)
4- हिमाचल में धर्मशाला(phone 09218414051)
5-देहरादून(phone 01352104555)
6- लेह- लद्दाख(phone 9906986655)
7- उत्तर प्रदेश में लखनऊ, (phone 05222968525)श्रावस्ती(05252265439), सारनाथ, (09307093485)कानपूर(phone 07388543793)
8- बिहार में मुजफ्फरपुर,(phone 09931161290) बोधगया, (phone 06312200437)नालंदा(9930796064)
9-राजस्थान में जयपुर, (phone 01412177446)पुष्कर 01452780570)अजमेर, जोधपुर,(phone 02912746435) चुरू,(phone 09414676081) आबू में अस्थाई केंद्र

(B)गुजरात
मांडवी कच्छ, (phone 02834273303)राजकोट,(phone 02812924924 मेहसाना,(phone 02762272800) अहमदाबाद,(phone 02714294690 नवसारी(phone 02634291100), भावनगर
(C) महाराष्ट्र
इगतपुरी, (phone 02553244076,)गोरई(मुम्बई),(02233747501) बेलापुर(नयी मुम्बई)(phone 02227522277), टिटवाला,(phone 9773069978) खडवाली(ठाणे), (phone 7798324659)पालघर, (phone 9371753833)नाशिक,(phone 02536516242) पुणे, (phone 02024468903, 02024436250)औरंगाबाद, (phone 9422211344)धुले,(phone 02562203482) कोल्हापुर,(02233747501) नागपुर, (phone 07122458686)चंद्रपुर(8007151050), अकोला,(phone 9579867890) वर्धा,लातूर, भंडारा, ओज़तोला, मोगरा, यवतमाळ,(9422865661) सुगतनगर
(D)दक्षिण भारत
बैंगलोर, (phone 08023712377)चेन्नई,(phone 9444280952) मदुराई,(9443728116) चेंगन्नूर(केरल),(04792351616) हैदराबाद,(04024240290) निज़ामाबाद, विजयरै(मंडलम), भीमावरम, नागार्जुन सागर(09348456780), कोन्दपुर(मेडक)
(E)मध्य और पूर्व भारत
मध्यप्रदेश में बालाघाट, जबलपुर, भोपाल,(phone 8435686418) इंदौर,(9893129888) रतलाम09827535257)
छत्तीसगढ़ में दुर्ग, (07883203513)बिलासपुर
कोलकाता(03325532855)
त्रिपुरा
खरियार रोड(उड़ीसा),जतनी,उड़ीसा
सिक्किम
कमला नगर(मिजोरम)
देश व विदेश के सभी केन्द्रो की
अधिक जानकारी व् बुकिंग के लिये-

Monday, February 1, 2016

जीवन का मूल्य क्या है?

एक आदमी ने भगवान बुद्ध से पुछा : जीवन का मूल्य
क्या है?
बुद्ध ने उसे एक Stone दिया और कहा : जा और इस
stone का
मूल्य पता करके आ , लेकिन ध्यान रखना stone को
बेचना नही है I
वह आदमी stone को बाजार मे एक संतरे वाले के पास
लेकर गया और बोला : इसकी कीमत क्या है?
संतरे वाला चमकीले stone को देखकर बोला, "12 संतरे
लेजा और इसे मुझे दे जा"
आगे एक सब्जी वाले ने उस चमकीले stone को देखा
और कहा
"एक बोरी आलू ले जा और इस stone को मेरे पास छोड़
जा"
आगे एक सोना बेचने वाले के
पास गया उसे stone दिखाया सुनार उस चमकीले
stone को देखकर बोला, "50 लाख मे बेच दे" l
उसने मना कर दिया तो सुनार बोला "2 करोड़ मे दे दे
या बता इसकी कीमत जो माँगेगा वह दूँगा तुझे..
उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरू ने इसे बेचने से मना
किया है l
आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे stone
दिखाया l
जौहरी ने जब उस बेसकीमती रुबी को देखा , तो पहले
उसने रुबी के पास एक लाल कपडा बिछाया फिर उस
बेसकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई माथा टेका l
फिर जौहरी बोला , "कहा से लाया है ये बेसकीमती
रुबी? सारी कायनात , सारी दुनिया को बेचकर भी
इसकी कीमत नही लगाई जा सकती ये तो बेसकीमती
है l"
वह आदमी हैरान परेशान होकर सीधे बुद्ध के पास
आया l
अपनी आप बिती बताई और बोला "अब बताओ
भगवान , मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?
बुद्ध बोले :
संतरे वाले को दिखाया उसने इसकी कीमत "12 संतरे"
की बताई l
सब्जी वाले के पास गया उसने इसकी कीमत "1 बोरी
आलू" बताई l
आगे सुनार ने "2 करोड़" बताई lऔर जौहरी ने इसे
"बेसकीमती" बताया l
अब ऐसा ही मानवीय मूल्य का भी है l
तू बेशक हीरा है..!!लेकिन, सामने वाला तेरी कीमत,
अपनी औकात - अपनी जानकारी - अपनी हैसियत से
लगाएगा।
घबराओ मत दुनिया में.. तुझे पहचानने वाले भी मिल
जायेगे।
Respect Yourself,
You are very Unique..🌾🌾🌾🌾🌾🌾

Thursday, January 28, 2016

बुद्ध प्रतिमाएं: बदल डाला तथागत का धर्म

बुद्ध प्रतिमाएं: बदल डाला तथागत का धर्म

15 December, 2012



आम लोगों के धर्म परिवर्तन की खबरें तो अकसर आती रहती हैं, लेकिन बिहार के नालंदा और बोधगया में बुद्ध प्रतिमाओं का ही धर्म परिवर्तन हो रहा है. यहां बौद्ध मूर्तियों को हिंदू मंदिरों में स्थापित कर उनकी हिंदू देवी-देवताओं की तरह पूजा-अर्चना हो रही है. गौतम बुद्ध की मूर्ति को तेलिया मसान की संज्ञा देकर तेल चढ़ाने, गोरैया बाबा के नाम पर बुद्ध की मूर्ति पर बलि देने, दारू चढ़ाने और देवी के नाम पर सिंदूर लगाए जाने जैसी बातें आम हैं. भगवान बुद्ध की मूर्तियों को ब्रह्मड्ढ बाबा, भैरों बाबा, विष्णु भगवान, बजरंग बली समेत कई हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर पूजा जा रहा है.

नालंदा के वड़गांव में श्री तेलिया भंडार भैरों मंदिर के एक दृश्य पर गौर फरमाएं. यहां भगवान बुद्ध की विशाल मूर्ति स्थापित है और माना जाता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी हर मन्नत पूरी होती है. यहां हर पहर लोगों का आना-जाना लगा रहता है और लोग बुद्ध की विशालकाय मूर्ति पर अपने बच्चों को मोटा होने, उनमें रिकेट्स, एनिमिया, सुखड़ा सहित कई तरह की बीमारियों से निजात दिलाने के लिए सरसों का तेल और सात प्रकार के अनाज चढ़ाते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. यहां भगवान बुद्ध की तेलिया बाबा के नाम पर स्थापित मूर्ति की ख्याति स्थानीय स्तर ही नहीं, विदेशों में भी है. बड़ी संख्या में थाई और नेपाली बौद्ध यहां आकर मंत्र जाप करते हैं. बुद्ध की मूर्ति पर तेल चढ़ाते हैं और रूमाल या पेपर से मूर्ति पर लगाए गए तेल को पोंछकर अपने शरीर पर मालिश करते हैं.

वड़गांव के नवीन कुमार बताते हैं, ''श्री तेलिया भंडार भैरों मंदिर की व्यवस्था वड़गांव पंडा कमेटी करती है. मंदिर के चढ़ावे से यहां के विकास और व्यवस्था से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी का इंतजाम किया जाता है.''

आस्था के नाम पर क्या हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति, बोधगया के सचिव नंद जी दोरजी इसे लेकर एकदम साफ जवाब देते हैं, ''हम सिर्फ महाबोधि मंदिर की देखभाल करते हैं. बाहर क्या हो रहा है, इससे हमें कोई लेना-देना नहीं.'' समाजशास्त्री प्रभात कुमार शांडिल्य ने तो और भी चौंकाने वाली बात बताई. उनका कहना है, ''बोधगया स्थित महाबोधि प्रांगण में गौतम बुद्ध की पांच मूर्तियों को पांच पांडव के रूप में पूजा जा रहा है.''

गया जिले के नरौनी गांव के महादेव और गोरैया स्थान में बौद्ध स्तूप हैं. शादी या अन्य किसी धार्मिक आयोजन पर यहां के लोग गोरैया स्थान में स्थापित बुद्ध की मूर्ति पर तपावन या चढ़ावा के रूप में बकरा, मुर्गा या कबूतर की बलि देकर दारू चढ़ाना अनिवार्य बताते हैं. गोरैया स्थान के पुजारी राजकिशोर मांझी कहते हैं, ''यह परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है.'' गया के ही नसेर गांव के ब्रह्म स्थान में ब्रह्म बाबा की नहीं बल्कि मुकुटधारी बुद्ध की मूर्ति स्थापित है, जिसे गांव के लोग ब्रह्म बाबा के नाम से वर्षों से पूजते आ रहे हैं. माधुरी कुमारी अपनी सास प्यारी देवी के साथ ब्रह्म बाबा (बुद्ध की मूर्ति) की आराधना के लिए आती हैं. माधुरी की 81 वर्षीया सास प्यारी देवी बताती हैं, ''हमारी सास भी ब्रह्म बाबा के नाम से ही पूजा करती थी.''

89 वर्षीय किशुन यादव के मुताबिक, मंदिर में स्थापित मूर्ति बुद्ध भगवान की है. मंदिर के मुख्य दरवाजे पर लगाये गये लोहे के गेट में बुद्ध भगवान ही लिखा हुआ है. लेकिन हम लोग वर्षों से बुद्ध भगवान को ब्रह्म बाबा के नाम पर पूजते आए हैं. आस्था यहीं खत्म नहीं होती. वे बताते हैं, ''ये जागृत ब्रह्म हैं. चोरों ने दो बार इस मूर्ति की चोरी करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके.'' गांव के ही नंदकिशोर मालाकार बताते हैं, ''लोहे की रॉड को हुक बनाकर बुद्ध की मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया गया है, ताकि चोर मूर्ति की चोरी न कर सके.'' यही नहीं, ग्रामीणों के आपसी सहयोग से ब्रह्म बाबा का मंदिर बनाया जा रहा है.

हालांकि बौद्ध मूर्तियों के इस हिंदूकरण को लेकर महाबोधि मंदिर मुक्ति आंदोलन समिति के राष्ट्रीय महासचिव भंते आनंद कहते हैं, ''बुद्ध को लोहे की बेडिय़ों में जकडऩा और हिंदू देवी-देवताओं की तरह पूजा करना बौद्धों का अपमान है.'' बौद्ध मूर्तियों के इस तरह हिंदू देवी-देवताओं के रूप में पूजे जाने की एक वजह उनकी उपेक्षा भी माना जाती है. शांडिल्य कहते हैं, ''जब बौद्ध धर्म का ह्रास हुआ तब जगह-जगह गांव में बिखरी मूर्तियों को अलग-अलग देवी-देवता के नाम से पूजा जाने लगा. कई जगह मंदिर भी बना दिए गए. यह काम लंबे समय से चला आ रहा है. यह सब बौद्ध धर्म को नष्ट करने की साजिश के तहत किया जा रहा है.''

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ आर्ट्स ऐंड ऐस्टथेटिक्स में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वाइ.एस अलोने इसे हिंदू साम्राज्यवाद कहते हैं. वे कहते हैं, ''इस बात का पता लगाया जाना जरूरी है कि कब और कैसे हिंदू बौद्ध मूर्तियों की पूजा करने लगे. यह हिंदुओं की ओर से बहुत ही सोचा-समझा कदम है. यह एक तरह से हिंदू साम्राज्यवाद का प्रतीक है.''

गुरुआ प्रखंड के ही दुब्बा गांव स्थित भगवती स्थान में बुद्ध की कई मूर्तियां और स्तूप हैं और कई यहां-वहां बिखरे पड़े हैं. मंदिर के अहाते में स्थापित बुद्ध की मूर्तियों की यहां के लोग अलग-अलग देवी-देवताओं के रूप में पूजा करते हैं. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित आशीर्वाद मुद्रा में लाल कपड़ों से ढके बुद्ध की आदमकद मूर्ति को यहां की महिलाएं देवी मानकर पूजती हैं. मंदिर के बाहर स्थापित बुद्ध की ही मूर्ति को विष्णु भगवान और बजरंग बली के रूप में पूजा जाता है. दुब्बा गांव की उर्मिला देवी ने सपरिवार भगवती स्थान में देवी मां की पूजा की. उन्होंने मंदिर में देवी के रूप में स्थापित बुद्ध की मूर्ति को नाक से लेकर सिर के ऊपरी हिस्से तक सिंदूर लगाया और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की. साथ में आई महिलाओं ने गीत से देवी की महिमा का गुणगान किया. दुब्बा के पूर्व मुखिया सूर्यदेव प्रसाद बताते हैं, ''अगर हम बुद्ध की इन मूर्तियों को हिंदू देवी-देवताओं के रूप में नहीं पूजते तो यह मूर्तियां भी नहीं बचतीं.''

गुरुआ प्रखंड के गुनेरी गांव में स्थित बुद्ध प्रतिमा की ठीक यही हालत है. यहां के लोग बुद्ध को भैरों बाबा के नाम पर पूजते हैं. गांव के ही सहदेव पासवान बताते हैं, ''पहले लोग इस मूर्ति पर दारू चढ़ाते और बलि देते थे. लेकिन जब से पुरातत्व विभाग ने गुनेरी को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया है तब से दारू और बलि पर पाबंदी लग गई है. लेकिन आज भी बुद्ध भैरों बाबा के नाम पर ही पूजे जा रहे हैं.''

मगध के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास पर शोध को अंजाम देने वाले डॉ. राकेश सिन्हा रवि ने बताया कि यहां के कई मंदिरों में हिंदू देवी-देवताओं के साथ स्थापित बुद्ध की मूर्तियों को अलग-अलग नामों से कुल देवता और लोक देवता के रूप में पूजा जा रहा है. दुब्बा, भूरहा, नसेर, गुनेरी, देवकुली, नरौनी, कुर्कीहार, मंडा, तारापुर, पत्थरकट्टी, जेठियन, औंगारी, कौआडोल, बिहटा, उमगा पहाड़, शहर तेलपा, तेलहाड़ा, गेहलौर घाटी में बुद्ध और हिंदू देवी-देवताओं में फर्क मिट गया है.

बौद्ध धर्म के इस हिंदूकरण का एक कारण बौद्ध धरोहर का इधर-उधर छितरा पड़ा होना भी है. संरक्षण की कोई व्यवस्था न होने के कारण लोग इस ऐतिहासिक धरोहर का इस्तेमाल अपने मन-माफिक कर रहे हैं.

मध्य विद्यालय दुब्बा परिसर में रखी गई बौद्ध काल की अर्द्धवृत्तिका पर महिलाएं मसाला पीसती हैं. विद्यालय परिसर में नीम के नीचे और इमामबाड़ा के पास रखे गए बौद्ध स्तूप का उपयोग यहां के लोग बैठने के लिए करते हैं. लोगों ने कई बौद्ध स्तूपों को अपने दरवाजे की शोभा के लिए स्थापित कर रखा है. अब्बास मियां ने अपनी नाली के पास बौद्ध स्तूप को इसलिए रख दिया है कि मिट्टी का कटान न हो. मोहम्मद मुस्तफा ने दरवाजे पर बैठने के लिए बौद्धकालीन अर्द्धवृत्तिका स्थापित कर रखी है. रामचंद्र शर्मा ने अनाज पीसने वाले मीलों में दो किलो से 20 किलो का बाट बौद्धकालीन पत्थर तोड़कर बनाया है. मध्य विद्यालय दुब्बा सहित गांव में निवास करने वाले हिंदू-मुसलमानों, दलितों और बडज़नों के घर-आंगनों में बौद्धकालीन कलाकृतियां, मूर्ति, स्तूप और अर्द्धवृत्तिका बहुतायत में बिखरे पड़े हैं.

भंते आनंद केंद्र सरकार पर बौद्ध स्थलों और बौद्धों की ओर ध्यान न देने का आरोप लगाते हैं. वे कहते हैं, ''भारतीय पुरातत्व विभाग को ऐसे स्थलों का सर्वेक्षण करवाकर विकास और बुद्ध से जुड़े अवशेषों को संरक्षित करना चाहिए. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुद्ध के नाम पर कारोबार करना चाहते हैं. उन्हें बौद्धों की आस्था से कोई लेना-देना नहीं है. पटना में करोड़ों की लागत से बुद्ध स्मृति पार्क का निर्माण किया गया है, लेकिन जहां बुद्ध के अवशेष बिखरे हुए हैं, उसका संरक्षण भी नहीं हो रहा है.''

समाजसेवी रामचरित्र प्रसाद उर्फ विनोवा ने महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति, बोधगया और यहां के विदेशी महाविहारों पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''बोधगया में जितने भी बौद्ध विहार हैं, वे बौद्ध धर्म के प्रति समर्पित नहीं हैं बल्कि इसे कारोबार बनाकर बैठे हैं.'' सबके अपने तर्क-वितर्क हो सकते हैं लेकिन यह बात हकीकत है कि विरासत का धर्म बदल रहा है

Tuesday, January 26, 2016

बोरिवली के संजय गांधी नैशनल पार्क में प्राचीन सात बौद्ध गुफाएं मिली हैं

बोरिवली के संजय गांधी नैशनल पार्क में प्राचीन सात बौद्ध गुफाएं मिली हैं। ये गुफाएं बौद्ध 'विहार' (जहां बौद्ध भिक्षु रहे) हैं। माना जा रहा है कि इनका निर्माण कन्हेरी गुफाओं से पहले और भिक्षुओं को बारिश से बचाने के लिए किया गया होगा।
हालांकि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण द्वारा इन गुफाओं के विस्तृत ब्योरे और दस्तावेजों की औपचारिक स्वीकृति मिलना अभी बाकी है, लेकिन इन्हें खोजने वाली टीम ने इनकी तारीख ईसा से एक शताब्दी पूर्व (1st Century BC) और पांचवीं-छठी शताब्दी ईसवी (5th-6th Century AD) के बीच बताई है। पिछले साल पुरातात्विक केंद्र, मुंबई विश्वविद्यालय और भारतीय संस्कृति विभाग द्वारा संयुक्त रूप से एक खुदाई कार्यक्रम के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय टीम ने इन गुफाओं की खोज की है। इसका नेतृत्व विभाग के प्रमुख सूरज पंडित ने किया।
उनका कहना है, 'ये गुफाएं कन्हेरी गुफाओं से ज्यादा पुरानी हो सकती हैं क्योंकि इनकी बनावट साधारण है और इनमें जलाशय नहीं हैं जोकि कन्हेरी गुफाओं में मिले थे। हमें कुछ अखंड औजार मिले हैं जो कि ईसा से एक शताब्दी पूर्व चलन में थे। जलाशयों का न होना यह बताता है कि भिक्षु वहां मॉनसून के वक्त रहा करते थे।' उन्होंने बताया कि इन गुफाओं का मिलना कोई अचानक से हुई खोज नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सर्वेक्षण का नतीजा है। खोज शुरू करने से पहले टीम ने तीन महीनें शोध किया जिसमें इलाके की भौगोलिक स्थिति और पानी के स्रोतों का अध्ययन शामिल था।
ईसा से पहली शताब्दी पूर्व और 10 शताब्दी के बीच बनीं कन्हेरी गुफाएं अपने जल प्रबंधन और बारिश के पानी को सिंचाई के उपयोग में आने के लिए प्रसिद्ध हैं।

Tuesday, January 19, 2016

प्रत्येक बुद्ध के अनुयायी के कर्तव्य

प्रत्येक बुद्ध के अनुयायी के कर्तव्य:

1. बौद्धों के घरों में तथागत बुद्ध, सम्राट चन्द्रगुप्त, सम्राट अशोक, बोधिसत्व  क्रान्तिवीर ज्योतिबा फुले एवं बौद्ध /  विद्वानों के अलावा अन्य किसी भी देवी-देवताओं के कलैन्डर, तस्वीरें, मूर्तियां आदि नहीं होने चाहिये.

2. किसी भी परिस्थिति में शराब, गांजा, अफीम, नस, तम्बाखू, बीडी, सिग्रेट, ड्रग्स आदि नशीले पदार्थों का सेवन वर्जित है.

3. किसी जीव की हत्या न करें और न इसके लिये किसी को प्रेरित करें.

4. मद्यपान, नशीले पदार्थ, जहर एवं हथियार का व्यापार निषिद्ध है.

5. गले, कमर या बांह में काला धागा, गंडा, ताबीज आदि अछूतपन एवं अंधविश्वासी होने का प्रतीक है अतः उक्त का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये.

6. किसी नदी, तालाब या समुद्र को पवित्र मानकर उसमें पैसे डालना, नहाना या हाथ जोड़ना अन्धविश्वास का द्योतक है तथा नदियों आदि में पैसे डालना राष्ट्रीय मुद्रा का दुरुपयोग है, अतः ऐसे कार्य न करें. 

7. भूत-प्रेत, टोना-टोटका, झाड़-फुक, पीर-फकीर, सूर्य-ग्रहण, चन्द्र-ग्रहण, अंधेरी-उजाली या ग्रह शान्ति हेतु यज्ञ एवं हवन करना, संध्या को बत्ती जलने पर प्रणाम करना, ग्रह, नक्षत्र के हिसाब से अंगूठी में नग पहिनना, छींक आने पर भगवान का नाम लेना आदि अंधश्रद्धा के प्रतीक हैं, अतः ऐसे कार्य नहीं करने चाहिये.

8. किसी भी धार्मिक, सामाजिक विवाह आदि में नारियल, सिन्धूर, तिलक, अष्टगंध, चावल आदि का प्रयोग न करें. चावल एक खाद्य पदार्थ है अतः इसका दुरुपयोग न करें.

9. विवाह के समय वर-वधू के पैर छूना दासता का प्रतीक है अतः ऐसा न करें. 

10. भिक्खू शील व मैत्री देते हैं अतः वैवाहिक कार्य बौद्ध भिक्खु से न करवायें वर्ना पण्डा, पादरी, पुजारी, पुरोहित, और भिक्खु में कोई फर्क नहीं रह जायेगा. 

11. बौद्ध त्योहारों के दिन अपने व्यक्तिगत आयोजन यथा गृह-प्रवेश आदि न करायें. इन्हें अन्य तिथियों में करायें वरना हमारे धार्मिक त्योहारों का महत्व कम हो जायेगा.

12. विधुर एवं विधवा विवाह को प्रोत्साहित करें. 

13. विवाह रात्रि में न करें. विवाह में नाच-गाना, मांसाहार, मदिरापान वर्जित है. दहेज लेना और देना अनुचित है. विवाह के अवसर पर सिर्फ वर-वधू को ही त्रिशरण एवं पंचशील लेना चाहिये, विवाह में उपस्थित सभी को नहीं. चावल का प्रयोग टीका बनाने या फेंकने हेतु न करें. 

14. विवाह मंडप में नाच-गान आदि नहीं करना चाहिये. 
15. दान राशि 11, 21, 51, 101, 151, 201, 501 आदि आंकड़ों में न दें. बौद्ध परम्परा में इसका कोई स्थान नहीं है. 

16. शवयात्रा में खाड पूजना अर्थात अर्थी के चारों कोनों में धान, कौड़ी, पैसा आदि रखना, शव को गुलाल हल्दी आदि लगाना, लाही, पैसा आदि फेंकना अंध श्रद्धा है. 

17. मृतक के मस्तक पर सिक्का रखना, सदगति हेतु मुह में गंगाजल डालना, परित्राण का पानी, सोने का पानी, तुलसी जल आदि डालना अंध श्रद्धा है. 

18. सामूहिक भोज खुशियों को प्रदर्शित करता है. किसी भी व्यक्ति की मृत्यु पर दुःख होता है. अतः तेरहवीं (मृतक भोज) बन्द करना अनिवार्य है. 

19. किसी भी धार्मिक स्थल के सामने गाड़ी का हार्न बजाना अन्ध श्रद्धा है. 

20. वंदना के समय सिर पर टोपी, पगड़ी, मुकुट या साड़ी का पल्लू आदि नहीं होना चाहिये. किसी व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने की यह हिन्दू परंपरा है. 

21. महिला के रजस्वला / प्रसव होने पर उसे छूत न मानें अपितु इस दौरान सफाई का पूर्ण ध्यान रखें क्योंकि ये प्राकृतिक / शारीरिक क्रियायें हैं.

22. किसी भी परस्थिति में अपशब्दों / गाली का प्रयोग नहीं करना चाहिये.

भगवान् बुद्ध के 38 महत्वपूर्ण उपदेश:

भगवान् बुद्ध के 38 महत्वपूर्ण उपदेश:💐

1. मूर्खो की संगति न करना ।
2. विद्वानों की संगती करना।
3. पूज्यनीय का सम्मान करना।
4. अनुकूल स्थान पर निवास करना।
5. पुण्य आचरण का संचय करना।
6. कुशल धर्म का संकल्प करना।
7. बहुश्रुत होना, धम्मग्रन्थों का ज्ञान होना।
8. शिल्प विद्याएं सीखना ।
9. शिष्ट होना।
10. सुशिक्षित होना।
11. सुन्दर वचन बोलना।
12. माता पिता की सेवा करना।
13. पत्नी औरबच्चों की सेवा करना
14. पाप रहित कर्मो को करना ।
15. दान देना।
16. मन, वचनऔर कर्म से पुण्य का संचय करना धर्म की सेवा करना।
17. अपने बंधुओं रिश्तेदारों का आदर सत्कार करना।
18. निर्दोष कार्यों को करना।
19. मन, वचन और शरीर से पाप कर्म न करना ।
20. शराब और किसी भी तरह का नशा न करना।
21. धम्म के कार्यो में आलस्य न करना।
22. गौरव मान-मर्यादा बढ़ाने वाले कार्य करना।
23. विनम्र होना।
24. संतुष्ट रहना।
25. कृत्यज्ञ होना।
26. उचित समय पर धम्म प्रवचन सुनना।
27. क्षमाशील होना।
28. गुरुजनो के आदेश का पालन करना।
29. संतो और अच्छे लोगों का दर्शन करना।
30. उचित समय पर धर्म प्रवचन देना लोगो को धर्म बताना।
31. तप करना और लक्ष्य प्राप्ति हेतु कष्टों को भी सहना।
32. ब्रह्मचर्य पालन करना।
33. चार आर्य सत्यों को समझना।(Four Noble Truths)
34. निर्वाण का साक्षात्कार करना, निर्वाणप्राप्ति के लिए परिश्रम करना।
35. लोक में न भटकना, अपनी चेतना शांत रखना, संसार के मोह माया में न फंसना, संसारमें विचलित न होना।
36. शोक न करना।
37. राग, द्वेष और मोह की रज से दूर रहना।
38. निर्भय 
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